कालूखेड़ा में जैन दिवाकर कस्तूर स्थानक भवन का लोकार्पण डॉ. गौतममुनिजी की प्रमुख उपस्थिति में, जबकि उद्घाटन पुणे के आनंद दरबार के अध्यक्ष बाबासाहेब धोका के हाथों संपन्न
पुणे, डॉ. संदेश शाह।
जैन दिवाकर श्री चौथमलजी महाराज साहब के दिव्य आशीर्वाद और महासती डॉ. मधुबालाजी महाराज साहब की प्रेरणा से कालूखेड़ा (जिला रतलाम, मध्य प्रदेश) में निर्मित 'भामाशाह श्री रसिकलालजी माणिकचंदजी धारीवाल जैन दिवाकर कस्तूर भवन' का लोकार्पण बहुश्रुत कवि प्रवर्तक श्री विजय मुनिजी, उपाध्याय डॉ. गौतम मुनि, उपप्रवर्तक श्री चंद्रेश मुनि और एकांत तप आराधक वैभव मुनिजी महाराज साहब की प्रमुख उपस्थिति में किया गया। वहीं, इस भवन का उद्घाटन पुणे आनंद दरबार के अध्यक्ष बाबासाहेब धोका के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ।
इस अवसर पर डॉ. गौतम मुनि महाराज साहब ने कहा:"धर्मस्थल हमारी संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं और ये आत्मचिंतन व मनन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। हालांकि, धर्मस्थलों का उपयोग केवल धार्मिक कार्यों के लिए ही होना आवश्यक है। धर्म प्रभावना के उद्देश्य से बनाए गए इस स्थानक के निर्माण में धारीवाल परिवार ने अमूल्य योगदान दिया है, और उनका चौतरफा कार्य अत्यंत सराहनीय है।"
वैभवमुनिजी महाराज साहब ने कहा कि आधुनिक सुविधाओं से युक्त धर्मस्थलों के निर्माण में समाज का सहयोग महत्वपूर्ण होता है। कालूखेड़ा के समाज बंधुओं और धारीवाल परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार सराहनीय योगदान दिया है। उन्होंने सभी से इसका लाभ उठाने का आह्वान किया।
उपप्रवर्तक चंद्रेशमुनि महाराज ने कहा कि अपनी आत्मिक उन्नति के लिए श्रावकों को धर्मस्थल जाकर धर्म-आराधना करना समय की मांग है।
इस दौरान प्रवर्तक विजयमुनिजी महाराज साहब ने पूज्य गुरुदेव रमेशमुनि महाराज साहब का स्मरण करते हुए बताया कि उन्हें छोटे गांवों में साधना करना बेहद पसंद था। इसलिए वे गांवों में स्थानक निर्माण पर विशेष जोर देते थे, जिससे धार्मिक संस्कारों का संवर्धन होता है
इस अवसर पर आनंद दरबार के अध्यक्ष बाबासाहेब धोका ने कहा:रसिकलाल धारीवाल परिवार एक दानवीर परिवार के रूप में जाना जाता है। इस परिवार ने महाराष्ट्र सहित पूरे देश में धार्मिक, सामाजिक, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। रसिकलालजी धारीवाल ने हमेशा धार्मिक कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए महत्वपूर्ण योगदान दिया और उनके सुपुत्र प्रकाशसेठ धारीवाल आज उसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके अनमोल योगदान के कारण देश भर में कई स्थानकों का काम पूरा हुआ है, जो धर्म साधना के प्रतीक बन चुके हैं।"
कार्यक्रम की अन्य झलकिया पत्र वाचन: महासती डॉ. मधुबालाजी के संदेश पत्र का वाचन मनोहर मेहता ने किया।स्वागत गीत: प्रियल भंडारी और सरिता भंडारी ने सुमधुर स्वागत गीत प्रस्तुत किया।अतिथि स्वागत व संचालन: अतिथियों का स्वागत संजय कटारिया ने किया। कार्यक्रम का संचालन सुभाष टुकड़िया ने और आभार प्रदर्शन विपुल मेहता ने किया
इस अवसर पर पुणे आनंद दरबार के अध्यक्ष बाबासाहेब धोका, अभय चोरड़िया, प्रवीण रांका, गणेश ओसवाल, मनसुख लोढ़ा, कालूखेड़ा के के. के. सिंह, राकेश मेहता, सुजानमल कोचट्टा, जयंतीलाल दख, सुशील चपडोद, चंद्रप्रकाश ओस्तवाल, पुखराज पारख, अजीत छिंगावत, मनीष भटेवरा, श्रीपाल कोचट्टा, बसंतीलाल चपडोद, विनोद लुनिया, पारसमल बर्डिया, संदीप रांका और शेखर नहार का विशेष सम्मान किया गया।
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